10+ आँखों के रोगों का नीम से इलाज

नीम पेड़ का भारतीय सभ्यता में और आयुर्वेदिक दवाओं में बहुत अधिक महत्व है। नीम के पेड़ का उपयोग अलग-अलग बीमारियों को ठीक करने में किया जाता है। नीम का उपयोग त्वचा संबंधी बीमारियों में, आंखों संबंधी बीमारियों में, चोट लगने पर, पेट संबंधी बीमारियों में किया जाता है। इसके अलावा नीम के और भी बहुत उपयोग हैं और इसके आयुर्वेदिक गुणों के कारण भिन्न-भिन्न बीमारियों में इसका उपयोग किया जाता है।

हमारी आंखों में अलग-अलग प्रकार के रोग हो सकते हैं जैसे – आंखों में खुजली, आंखों में जलन, आंखों का सूचना, आंखों का दर्द, आंखों में लालिमा, आंखों की रोशनी कम होना इत्यादि। नीम के उपयोग से हम आंखों के रोगों का इलाज कर सकते हैं। परंतु आंखों के अलग-अलग रोग के लिए नीम का अलग-अलग प्रकार से उपयोग किया जाता है।

नीचे कुछ ऐसी विधि दी गई है, जिनसे आप आंखों के रोगों के लिए नीम से दवा बना सकते हैं और उनसे छुटकारा पा सकते हैं।

आँखों के रोगों का नीम से इलाज

  1. 10 ग्राम साफ रुई लें और अच्छी प्रकार से फैला लें, इसके ऊपर 30 नीम के सूखे पत्ते और 1 ग्राम कपूर का चूर्ण छिड़ककर इसे लपेटकर बत्ती बनाएं। अब इस बत्ती को गाय के घी में भिगोकर रखें। जब यह अच्छी तरह से गाय के घी में भीग जाए तब इसे जला कर इसका काजल बना कर रख ले। अब इसका काजल का उपयोग आप आंखों की लाली दूर करने में, आंखों से पानी गिरना आदि आंख के रोग के लिए कर सकते हैं।
  2. 10 ग्राम नीम के पत्ते लें और बराबर मात्रा में लोध्र (Symplocos) चूर्ण को इसमें मिला लो। अब दोनों को बारीक कूटकर एक पोटली में भर ले। अब इस पोटली के ऊपर पानी डालें। धीरे-धीरे यह पानी इस पोटली से होकर नीचे की तरफ टपकना शुरू हो जाएगा। इस पानी को शीशे की बोतल में रखें और इसकी दो दो बूंदें आंखों में डालने से आंखों का दर्द, आंखों की सूजन ठीक होती है।
  3. 20 ग्राम नीम के कोमल पत्ते लें और उन पत्तों को कूट कर उनका रस निकाल लें। अब नीम के पत्तों के रस को हल्का गुनगुना गर्म करें और जिस आंख में दर्द हो उस आंख के विपरीत दिशा में मौजूद कान में इस रस को डालें। यदि दोनों आंखों में दर्द महसूस हो रहा है तो आप दोनों कानों में इस रस को डाल सकते हैं। ऐसा करने से आंख का दर्द समाप्त होगा। बाकी बचे रस को आप रख सकते हैं और इसका उपयोग हल्का गुनगुना करके दोबारा से कर सकते हैं।
  4. मिट्टी के बर्तन में 1 किलो नीम के पत्तों को डालें और उस मिट्टी के बर्तन को अच्छी प्रकार से ढक कर या मिट्टी का लेप करके आग में डाल दें। ऐसा करने से नीम के पत्तों की राख बन जाएगी। अब उस रात को किसी बर्तन में निकालने और 200 मिलीलीटर नींबू का रस उसमें मिलाकर एक मिश्रण तैयार करें। इस मिश्रण को छांव में सुखाकर किसी ऐसी बोतल में भर लें जिसमें हवा अंदर ना जा सके। अब आप इस मिश्रण का उपयोग काजल की तरह कर सकते हैं जो आपको आंखों की खुजली और आंखों की जलन ठीक करने में मदद करेगा।
  5. यदि आंखों में दर्द के साथ सूजन है तो नीम के पत्तों को सोंठ के साथ पीस लें और उसमें थोड़ा-सा सेंधा नमक मिलाने। अब इस मिश्रण को हल्का सा गर्म कर लें और गरम मिश्रण को एक कपड़े की पोटली में बांधकर आंखों के ऊपर रखें। यदि आप इस मिश्रण से अपनी आंखों की सिकाई करते हैं तो यह आंखों में दर्द को खत्म करता है और इसके साथ-साथ आंखों में होने वाली सूजन से छुटकारा दिलाता है। रात्रि के समय आंखों की सिकाई करना अत्यंत लाभकारी होता है क्योंकि जब आप आंखों की सिकाई कर रहे हो तो उस समय ठंडे पानी और ठंडी हवा से आंखों को बचाना चाहिए।
  6. सौ ग्राम नीम के पत्ते लें और उन्हें अच्छी तरह से पीस लें। अब पिसे हुए नीम के पत्तों को सरसों के तेल में पका लें। जब सरसों के तेल में आप इसे हुए नीम के पत्तों को तक आएंगे तो उनका रंग काला हो जाएगा। जगदीश का रंग काला हो जाए तो इसमें सात से आठ ग्राम कपूर और 7 से 8 ग्राम कलमी शोरा मिला ले।अब इस मिश्रण को अच्छी तरह से घुटने और ठंडा करके कांच की शीशी में भरकर रखें। अब इस मिश्रण को काजल की तरह उपयोग कर सकते हैं। रात्रि में इस काजल को आंखों में लगाएं और सुबह त्रिफला के पानी से आंखों को अच्छी प्रकार से धो लें। सप्ताह में एक या दो बार ऐसा करने से आंखों की जलन, आंखों की खुजली, आंखों की लालिमा आदि समस्याएं दूर होती हैं और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  7. 50 नीम की कोपलें, 50 ग्राम जस्ता भस्म, 10 लॉन्ग, 10 छोटी इलायची, 50 ग्राम मिश्री ले। इन सभी का मिश्रण बनाकर अच्छी तरह से महीन पीस लें। पिसे हुए मिश्रण को कपड़े में से छान लें और चने हुए मिश्रण का काजल बना कर रख ले। इसका जल का उपयोग करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आम आंखों के रोग दूर होते है।
  8. सौ ग्राम नीम के फूल ले और उन्हें छाया में सुखा लें, सूखने के पश्चात सौ ग्राम कलमी शोरा इसमें मिलाकर महीन पीस लें। पिसे हुए मिश्रण को कपड़े से छान लें। अब इस मिश्रण का काजल बनाएं और इसे किसी शीशे की बोतल में रख ले। यदि आप कम मात्रा में इस काजल को बनाना चाहते हैं तो आप नीम और कलमी शोरा की मात्रा को घटा सकते हैं। इसका जल के उपयोग से धुंधलापन, मोतियाबिंद, जाला इत्यादि आंखों के रोगों से छुटकारा पाने में सहायता होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
  9. मोतियाबिंद की समस्या से आंखों की रोशनी भी जा सकती हैं। यदि नीम के बीज की मिंगी का चूर्ण आंखों में काजल की तरह प्रयोग किया जाए तो इससे मोतियाबिंद की समस्या से छुटकारा पाने में सहायता होती है।
  10. नीम के कच्चे फल यानी निंबोली को निचोड़ कर उसका दूध निकालने और उस दूध को रतौंधी में मिलाकर आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों के रोग दूर होते हैं।

Note: यदि आप आंखों की किसी गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं तो इन घरेलू नुस्खों का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर द्वारा सलाह जरूर लें। यदि आप किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर द्वारा इलाज करवा रहे हैं तो उनसे भी इसके बारे में सलाह जरूर लेनी चाहिए।


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