दस्त का घरेलू इलाज – dast ka ilaj

दस्त एक आम बीमारी है, और दस्त का घरेलू इलाज बहुत आसानी से किया जा सकता है। वैसे तो दस्त होने पर शरीर में कमजोरी महसूस होती है, लेकिन ऐसा बहुत कम ही देखा गया है कि दस्त के कारण कोई व्यक्ति हॉस्पिटल जाता हो। आयुर्वेद का जानकार दस्त रोकने के घरेलू उपाय से ही दस्त का इलाज कर लेता है। लेकिन अधिकतर लोग दस्त का घरेलू इलाज नहीं जानते हैं और वह डॉक्टर से एलोपैथिक दवाइयों से इसका इलाज करते हैं।

दस्त का इलाज (Dast ka ilaj) घर पर ही संभव है। यदि आप दस्त रोकने के उपाय जानना चाहते हैं तो यहां पर दी गई सभी जानकारियों को आखिर तक पढ़ें। इस लेख में आप को दस्त रोकने के घरेलू उपाय के साथ-साथ इससे संबंधित सभी जानकारियां मिलेंगी।

दस्त की बीमारी क्या है?

दस्त की बीमारी में मल काफी पतला हो जाता है और पानी की तरह है गुदाद्वार से मल बार-बार बाहर आता है। दोस्त की बीमारी में कुछ भी खाया पिया नहीं पचता और जो भी खाना खाया जाता है शरीर उसे बचा नहीं पाता और मल के रास्ते बार-बार बाहर निकालता रहता है।

शरीर में वात दोष असंतुलित हो जाता है जिस कारण शरीर की पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसा होने से कोई भी खाना शरीर नहीं बचा पाता और जब यह बिना पचा हुआ खाना पतले मल के रूप में बार-बार बाहर आता है तो इसे दस्त की बीमारी कहते हैं।

दस्त के अन्य नाम

दस्त के कुछ अन्य नाम भी है, यह नाम दस्त होने के अलग-अलग कारण और परिस्थिति के लिए हैं।

  • दस्त – मल का पतला होना और मल त्याग के लिए बार-बार जाना दस्त कहलाता है।
  • लूज मोशन (Loose Motion) – लूज मोशन, दस्त का ही अंग्रेजी नाम है।
  • अतिसार – दस्त में पानी की मात्रा ज्यादा होना, अतिसार कहलाता है। इसमें शरीर में पानी की कमी बहुत तेजी से होती है।
  • डायरिया (Diarrhea/Diarrhoea) – डायरिया, अतिसार का ही अंग्रेजी नाम है।
  • पेचिश – जब दस्त के साथ खून आना शुरू हो जाए तो उसे पेचिश कहा जाता है। यह मुख्यतः आंत के संक्रमण के कारण होता है। पेचिश को आंव के नाम से भी जाना जाता है।

Note: हमने किस लेख में दस्त को लूज मोशन, डायरिया और अतिसार के नाम से भी लिखा है। यदि आप किसी जगह पर यह नाम देखते हैं तो इनका एक ही मतलब है।

दस्त की बीमारी के कारण

मुख्यतः अस्वस्थ भोजन और दूषित पानी दस्त की बीमारी का कारण बनता है। अस्वस्थ भोजन और दूषित पानी के अलावा भी बहुत से ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से दस्त की बीमारी हो सकती हैं।

कुछ दस्त होने के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं:-

  • दूषित पानी या अस्वस्थ भोजन के कारण पेट में संक्रमण हो जाता है जिससे पाचन क्रिया प्रभावित होती है। पेट की पाचन क्रिया प्रभावित होने के कारण दस्त की समस्या होती है।
  • अगर हम बाहर का खाना या तला हुआ खाना जैसे समोसा, बेसन से बने हुए खाने की वस्तुएं, पिज़्ज़ा बर्गर इत्यादि खाते हैं तो इस कारण पाचन क्रिया प्रभावित हो सकती है। ज्यादा बाहर का खाना खाने से पेट संक्रमित हो सकता है।
  • मन में भय उत्पन्न होना और मानसिक तनाव भी दस्त का कारण बन सकता है।
  • सामान्य मात्रा से ज्यादा मात्रा में तेल या मिर्च-मसाला इत्यादि का सेवन इस बीमारी का कारण बनता है।
  • ज्यादा मात्रा में मीठी चीजें खाना भी दस्त होने का कारण हो सकता है।
  • यदि मल को ज्यादा समय तक रोकते हैं, तो उससे पेट में संक्रमण फैल सकता है जिस कारण दस्त की बीमारी हो सकती है।
  • एंटीबायोटिक दवाइयों के सेवन से भी दस्त हो सकते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति को किसी खाने से एलर्जी है, तो वह खाना लूज मोशन का कारण बन सकता है। उदाहरण के तौर पर कई व्यक्तियों को ग्लूटेन एलर्जी होती है, और यदि वह गेहूं से बनी खाने की चीजें खाते हैं तो उन्हें लूज मोशन हो सकते हैं।

बच्चों को दस्त होने के कारण

  • किसी कारण यदि मां के स्तनों का दूध दूषित हो जाता है तो यह शिशु को दस्त होने का कारण बनता है।
  • यदि कोई बच्चा स्तनपान करता है और मां द्वारा तैलीय भोजन और मिर्च मसाले वाला भोजन किया जाता है तो यह स्तन के दूध को दूषित कर सकता है। ऐसा होने से बच्चे को दस्त होते हैं।
  • जिस दूध की बोतल में बच्चा दूध पीता है, यदि उसको उबले हुए पानी से अच्छी तरह से साफ न किया जाए तो वह बोतल संक्रमित हो सकती है जो बच्चों में दस्त का कारण बनता है।
  • यदि बच्चा संक्रमित पानी का सेवन करता है इससे बच्चे को लूज मोशन हो सकते हैं।
  • कम मात्रा में पानी पीना और बिना हाथ धोए बच्चे को खाना खिलाना बच्चों में डायरिया होने का कारण बनता है।
  • जो बच्चे बाहर का खाना जैसे बर्गर, समोसे, पिज़्ज़ा, आइसक्रीम आदि का सेवन करते हैं, उन्हें पेट में संक्रमण होने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसा खाना खाने से बच्चों में अतिसार होता है।

दस्त के लक्षण

  • पानी जैसे पतले मल का बार बार आना
  • पेट में दर्द या सूजन का महसूस होना
  • शरीर में पानी की कमी और बार-बार प्यास लगना
  • कुछ भी खाने पर शरीर द्वारा उसे पचा न पाना
  • पेट में ऐंठन महसूस होना
  • बार बार उल्टी होने जैसा महसूस करना

लूज मोशन बीमारी का स्तर

लूज मोशन, दस्त या डायरिया की 3 स्टेज होती है जिसका अंदाजा मल में पानी की मात्रा और कितनी बार मल त्याग हुआ है उससे लगाया जाता है।

  1. हल्के लूज मोशन/डायरिया – इस स्टेज में दिन में कुछ ही बार पतले मल का त्याग होता है। इस स्थिति में बहुत ही आसानी से दस्त का घरेलू इलाज किया जा सकता है।
  2. मध्यम लूज मोशन – यदि दिन में 10 बार मल त्याग के लिए जाना पड़ता है तो यह मध्यम स्तर के अतिसार है। इस स्तर पर दस्त रोकने के घरेलू उपाय किए जा सकते हैं, और आसानी से घरेलू उपचार से दस्त का इलाज ( dast ka ilaj ) किया जा सकता है।
  3. गंभीर दस्त/लूज मोशन/डायरिया – यह लूज मोशन की सबसे गंभीर अवस्था होती है इसमें 10 से अधिक बार पतले मल का त्याग होता है और बार-बार मल त्याग की इच्छा होती है। इस स्थिति में शरीर काफी कमजोर हो जाता है। दस्त की गंभीर अवस्था में दस्त का घरेलू इलाज किया जा सकता है। लेकिन अगर घरेलू दस्त रोकने के उपाय से फायदा ना हो तो डॉक्टर से इलाज कराना उचित होगा।

वैसे तो दस्त रोकने के घरेलू उपाय से तीनों स्तर के लूज मोशन को रोका जा सकता है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति बहुत अधिक कमजोरी महसूस कर रहा है, तो डॉक्टर से दस्त का इलाज कराना चाहिए। क्योंकि, दस्त होने के कारण शरीर में पानी की बहुत अधिक कमी हो जाती है। शरीर में पानी की कमी आप को और अधिक बीमार बना सकती है, इसीलिए गंभीर स्थिति में डॉक्टर से dast ka ilaj/दस्त का इलाज करवाना चाहिए।

दस्त का घरेलू इलाज – dast ke gharelu upay

हमारे घरों में ऐसी अनेकों चीज मौजूद होती है जिन से बड़ी ही आसानी से दस्त का घरेलू इलाज किया जा सकता है। आपने अक्सर दादी या नानी को दस्त की बीमारी में घरेलू चीजों से ही दस्त रोकने के उपाय करते हुए देखा होगा। हमने कुछ ऐसी घरेलू चीजों से और आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से दस्त रोकने के उपाय बताए हैं।

1. चाय पत्ती से दस्त का घरेलू इलाज

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
चाय पत्ती से दस्त का घरेलू इलाज

चाय पत्ती दस्त का घरेलू इलाज करने का एक बहुत ही अच्छा विकल्प है। हमारे घरों में चाय पत्ती का उपयोग चाय बनाने के लिए किया जाता है और लगभग हर घर में चाय पत्ती उपलब्ध होती है।

दस्त होने पर एक चम्मच चाय पत्ती पानी के साथ ले। चाय पत्ती को फाँकी की तरह लेना है और ऊपर से पानी पी लेना है। ऐसा करने से बार बार दस्त होना रुक जाएगा। यदि तबीयत ज्यादा खराब है और बार-बार मल त्याग के लिए जाना पड़ रहा है तो आप दिन में तीन बार चाय पत्ती ले सकते हैं।

2. नींबू से पेचिश का इलाज

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
निम्बू से दस्त का इलाज

एक कप ताजा पानी में एक मध्यम आकार के नींबू का रस मिलाकर दिन में कम से कम 4 बार इसका सेवन करें। नींबू पानी के इस सेवन से आंतों की सफाई होती है और दस्त से छुटकारा मिलता है। यदि कोई व्यक्ति पेचिश से परेशान है मतलब कि दस्त के साथ खून आता है तो यह दस्त रोकने का घरेलू नुस्खा बहुत ही कारगर सिद्ध होगा।

यदि शरीर में कमजोरी महसूस हो रही है तो इस मिश्रण में चीनी मिलाकर पी सकते हैं। यदि आपको मधुमेह है तो चीनी लेने से बचें।

3. जीरा करे दस्त का इलाज

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
जीरे से दस्त का इलाज

जीरे का उपयोग सब्जी में और अन्य चीजों में किया जाता है। यह बहुत ही आसानी से रसोई में मिल जाता है। जीरा एक बहुत ही गुणकारी औषधि है, जिसका उपयोग कई बीमारियों में किया जाता है। जीरे से दस्त का इलाज भी किया जाता है। आधा चम्मच जीरे को हल्का भून लें, अब एक कप दही लें और उसमें इस भुने हुए जीरे को अच्छे से मिला ले। भुने हुए जीरे और दही का मिश्रण लेने से दस्त में काफी फायदा मिलता है।

अगर दही ना मिले तो जीरा पानी भी काफी असरदार साबित होता है। पहले एक गिलास पानी लें और उसमें जीरा डालकर उसे अच्छी तरह से गर्म कर लें। जीरा उस पानी में अपना रंग छोड़ देगा। इसके पश्चात उस पानी को छान लें और गुनगुना होने पर उसका धीरे-धीरे सेवन करें। दिन में तीन से चार बार जीरा पानी पीने से दस्त में काफी लाभ मिलता है।

4. बेल के फल से रोके दस्त

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
बेल से दस्त का इलाज

पके हुए बेल फल का गुदा दस्त रोकने में फायदेमंद होता है। बेल का फल काफी गुणकारी होता है और सेहत के लिए बहुत ही फायदेमंद है। यदि बेल फल के गूदे को दही के साथ मिलाकर इसका सेवन किया जाए तो दस्त में आराम मिलता है।

5. डायरिया में धनिया का प्रयोग

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
सूखा धनिया लूज मोशन में लाभकारी होता है।

डायरिया होने पर शरीर में पानी की अत्यधिक कमी हो जाती है। मरीज को बार-बार प्यास लगती है लेकिन वह पानी तक नहीं पचा पाता। ऐसी स्थिति में 2 लीटर पानी ले और उसमें दो चम्मच सूखा धनिया डालकर उसे अच्छी तरह से उबाल लें।

उस पानी को उबलता रहने दे और जब वह पानी 1 लीटर बच जाए तब उस पानी को छान लें और ठंडा करके किसी बोतल या बर्तन में रख ले। डायरिया के रोगी को प्यास लगने पर यह पानी पिलाएं। धनिया पानी से डायरिया में फायदा होता है और इसकी रोकथाम में यह काफी असर दायक है।

6. सौंफ से दस्त का घरेलू उपचार

आधा चम्मच सौंफ को भून लें। अब समान मात्रा में कच्ची सौंफ लें और दोनों को मिला ले। दिन में तीन बार एक एक छोटा चम्मच रोगी को देने से दस्त में आराम मिलता है।

7. पपीता है दस्त का रामबाण इलाज

दस्त का घरेलू इलाज - dast ka ilaj
दस्त का रामबाण इलाज है पपीता

एक छोटा कच्चा पपीता लें और उस पपीते के 5 से 6 टुकड़े कर लें। अब उन टुकड़ों को पानी में अच्छी तरह से उबाल लें। यदि इन उबले हुए पपीते के टुकड़ों का सेवन दिन में दो बार किया जाए तो गंभीर दस्त की समस्या भी ठीक हो जाती है।

दस्त में खानपान का रखें ध्यान

दस्त में खानपान का ध्यान रखना अति आवश्यक है, क्योंकि खानपान पर ही यह निर्भर करता है कि आप अपनी स्थिति को सुधरेंगे या और ज्यादा बिगाड़ लेंगे। नीचे कुछ ऐसी खानपान से संबंधित जानकारियां आपको दी गई है जिनका आपको दस्त के दौरान ध्यान रखना है।

दस्त में क्या खाना चाहिए?

  • पानी का सेवन करें – लूज मोशन होने पर शरीर में अत्याधिक आने की कमी हो जाती है। क्योंकि शरीर में मौजूद पानी मल के रास्ते बाहर निकलता रहता है। इसीलिए जितनी बार भी मल त्याग करने जाएं उसके बाद पानी अवश्य पिए। ज्यादा पानी पीने से शरीर में पानी की कमी नहीं होगी और लूज मोशन भी जल्दी ठीक हो जाते हैं। लेकिन अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन मौसम को बढा भी सकता है इसलिए जरूरत से ज्यादा अत्यधिक मात्रा में पानी का सेवन ना करें।
  • नींबू, नमक, पानी और चीनी का घोल – नींबू, नमक, पानी और चीनी के घोल को नींबू पानी के नाम से जाना जाता है। इसका सेवन करने से शरीर में पानी की कमी नहीं रहती और अतिसार में आराम भी मिलता है।
  • गाजर का जूस – अगर आपको पेचिश है और वक्त के साथ खून भी आ रहा है तो आपको गाजर जूस का सेवन करना चाहिए।
  • दही का सेवन – दही में मौजूद सेहतमंद बैक्टीरिया पेट में संतुलन बनाने में मदद करते हैं जिससे पेट जल्दी ठीक हो जाता है। यह पेट को ठंडा भी रखता है और यदि दस्त होने पर पेट में दर्द महसूस होता है तो दही का इस्तेमाल काफी फायदेमंद है।
  • मसूर दाल का सूप – दस्त होने पर मसूर दाल का सूप बहुत ही फायदेमंद होता है। यदि दस्त का पतलापन अधिक है तो मसूर दाल का सूप इसमें फायदा देगा।
  • बिना तेल वाला खाना – इस बीमारी में मूंग की खिचड़ी, दलिया, लौकी, और बिना तला हुआ खाना खाना चाहिए।
  • अदरक का सेवन – अदरक एक एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जिसका इस्तेमाल खाना बनाने में भी किया जाता है। यदि पेट के इंफेक्शन के कारण दस्त हुए हैं तो एक चम्मच अदरक पाउडर को दूध में मिलाकर पीने से आराम मिलता है।

बच्चों को दस्त में क्या खाना चाहिए?

  • ताजा फलों का रस – बच्चों को दस्त में ताजा फलों का रस देना चाहिए और सूट व दाल की खिचड़ी फायदेमंद होती है।
  • छाछ – छोटे बच्चों को छाछ देना 10 में आराम दिलाता है और शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता।
  • ओआरएस घोल – 1 लीटर पानी उबालकर ठंडा कर लें और उसमें एक पैकेट ओवर रस मिला लें और हर आधे घंटे बाद बच्चे को थोड़ा-थोड़ा करके खिलाए ऐसा करने से बच्चे की भूख बढ़ती है और शरीर में पानी व नमक का संतुलन बना रहता है।
  • हरी सब्जियों का सूप – हरी सब्जियों का सूप बच्चे को थोड़ी थोड़ी देर में देना फायदेमंद होता है और पानी की कमी को पूरा करता है।
  • चावल का पानी – चावल का पानी भी बच्चों को देने से शरीर में पानी की कमी दूर होती है।

दस्त में क्या नहीं खाना चाहिए?

  • सॉफ्ट ड्रिंक और शराब का सेवन – दस्त होने पर सॉफ्ट ड्रिंक और शराब का सेवन चींटी को और अधिक बिगाड़ सकता है इसीलिए इनका सेवन करने से बचना चाहिए।
  • तला हुआ खाना – पेचिश होने पर तला हुआ खाना पेट के इंफेक्शन को और अधिक बढ़ा सकता है और आंतों को नुकसान पहुंचाता है। तला हुआ खाना जैसे समोसे, नमकीन इत्यादि खाने से बचना चाहिए।
  • बाहर का खाना या फास्ट फूड – बाहर के खाने और फास्ट फूड में अक्सर ज्यादा मिर्ची मसाला का उपयोग किया जाता है और यह ज्यादातर के लिए भोजन होता है। इसीलिए बाहर का खाना जैसे बर्गर, पिज़्ज़ा, पेस्ट्री, आइसक्रीम, चाऊमीन इत्यादि खाने से परहेज रखना चाहिए।
  • बासी खाना – कई व्यक्ति अक्सर रात का बचा हुआ खाना सुबह या फिर सुबह का बचा हुआ खाना रात को खा लेते हैं। ऐसा खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपके पेट में इन्फेक्शन को बढ़ाता है जो आपकी स्थिति को बदतर करेगा।
  • अचार और चटनी – आचार में तेल में मिर्ची की मात्रा ज्यादा होती है और चटनी में भी मिर्ची व मसाले की मात्रा ज्यादा होती है इसलिए इन्हें खाने से बचना चाहिए।
  • बेकरी उत्पाद – बेकरी उत्पाद जैसे केक, पेस्ट्री वह आइसक्रीम इत्यादि खाने से बचना चाहिए क्योंकि इन्हें बनाने के लिए अलग-अलग प्रोसेस से गुजारा जाता है और इन्हें बचाना इतना आसान नहीं होता। यह आपकी स्थिति को और अधिक बिगाड़ सकता है।
  • दूध और मिठाईयां – कम से कम दूध लेने की कोशिश करें और मिठाईयां ना खाएं तो वह बेहतर होगा।

लूज मोशन से कैसे बचें?

लूज मोशन होने के बहुत सारे कारण हो सकते हैं लेकिन यदि आप कुछ बातों का ध्यान रखेंगे तो आप लूज मोशन से बचाव कर सकते हैं।

  • हमेशा खाना खाने से पहले हाथ पानी के साथ धो लें
  • खाना बनाने में वह सब्जी बनाने में साफ पानी का प्रयोग करें
  • खाने के बर्तन व आसपास की जगह को साफ सुथरा रखें
  • फाइबर युक्त खाने का सेवन करें
  • पहले का बचा हुआ खाना या नहीं बासी खाना ना खाएं
  • जरूरत से ज्यादा खाना नहीं खाना चाहिए
  • बाहर का खाना खाने से बचें और यदि खाए तो यह सुनिश्चित करें कि जहां पर वह खाना बन रहा है वहां पर गंदगी ना हो।
  • सब्जी या फिर किसी भी प्रकार के खाने में मसाले का प्रयोग कम से कम करें

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