मंगलवार, फ़रवरी 7, 2023

माइग्रेन के लक्षण और उपाय, नुकसान

हजारों लाखों लोग दुनिया में माइग्रेन रोग से पीड़ित हैं। माइग्रेन रोग में सिर में हल्का और कष्टदायक दर्द होता है, कुछ मामलों में सिर में एक तरफ झनझनाहट के साथ बहुत तेज दर्द होता है।

माइग्रेन के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं पर ज्यादातर मामलों में यह समान पाए जाते हैं। माइग्रेन के शुरुआती लक्षण को पहचान कर हम इसका उपाय कर सकते हैं। माइग्रेन के नुकसान बहुत ज्यादा है जिनका असर हमारे शरीर पर और यहां तक की भावना तक पर भी पड़ता है।

माइग्रेन रोग क्या है? – Migraine in hindi

माइग्रेन एक प्रकार का सिरका बहुत तेज या हल्का दर्द होता है, जिसमें मितली, उल्टी भी हो सकती है। माइग्रेन होने पर व्यक्ति प्रकाश व आवाज के प्रति काफी संवेदनशील हो जाता है। अचानक प्रकाश का आंखों में पढ़ना या तेज आवाज होना माइग्रेन को बढ़ा सकता है।

कई व्यक्तियों को माइग्रेन का दर्द सिर के एक हिस्से में महसूस होता है। 40 से 45 वर्ष की आयु के व्यक्तियों को Migraine की समस्या होने की संभावना अधिक होती है, और पुरुषों की तुलना में महिलाओं में Migraine रोग ज्यादा देखा जाता है। हार्मोन के बदलाव के कारण माइग्रेन की समस्या हो सकती है।

माइग्रेन का दर्द सामान्य से लेकर काफी तेज हो सकता है। एक शोध में पता लगा है कि पूरे विश्व की 1% के लगभग आबादी को Migraine की समस्या है।

माइग्रेन का हिंदी में मतलब – Migraine meaning in hindi

माइग्रेन को हिंदी में अधकपारी कहते हैं। इसका सम्बंध स्वैच्छिक तंत्रिका तंत्र से भी है और अधकपारी होने पर सिर में तेज और मध्यम स्तर का दर्द होता है। अधकपारी/माइग्रेन का दर्द असहनीय होता है, जो अक्सर 2 घंटे से लेकर 72 घंटे तक बना रहता है।

Note: इस लेख में हमने माइग्रेन को बहुत जगह पर अधकपारी भी लिखा है।

माइग्रेन कितने प्रकार के होते हैं?

  • क्रोनिक – क्रोनिक लम्बे समय तक परेशान कर सकता है। कई मामलों में यह लगातार परेशान कर सकता है।
  • मासिक धर्म सम्बंधित – मासिक धर्म के चक्कर के साथ यह दर्द होता है। जो महीने में एक बार आपको परेशान कर सकता है। यह मासिक धर्म के समय हार्मोंस में होने वाले बदलाव के कारण होता है। जो आमतौर पर लम्बे समय तक परेशान नहीं करता।
  • एब्डोमिनल – इसके कारण 15 साल से कम बच्चों को यह समस्या होती है और यह पेट व आँतों की समस्या का कारण बनता है।
  • वेस्टिबुलर – वेस्टिबुलर माइग्रेन में गम्भीर चक्कर आते हैं।
  • हेमिप्लेजिक – इस माइग्रेन में लकवे की समस्या हो सकती है और शरीर एक तरफ़ या दोनो तरफ़ लकवा लग सकता है।
  • बेसिलर – यह एक दुर्लभ प्रकार का माइग्रेन है जो न्यूरोलॉजिकल कार्यों को प्रभावित करता है। इस तरह के अधकपारी में बोलने में समस्या होती है।

माइग्रेन के लक्षण -Migraine symptoms in hindi

माइग्रेन के लक्षण 4 चरणों में देखे जा सकते हैं। हर चरण में माइग्रेन के लक्षण भिन्न होते हैं और इनकी समय सीमा भी अलग-अलग होती हैं। सिर में होने वाला दर्द का स्तर भी इन चरणों में अलग-अलग देखा जाता है।

1. प्रोड्रोम

प्रोड्रोम माइग्रेन के लक्षण का पहला चरण है जो सिर दर्द होने से पहले इसके कुछ लक्षण अधकपारी से पीड़ित व्यक्ति में दिखाई देते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि सभी अधकपारी से पीड़ित व्यक्तियों को इस चरण के लक्षण दिखाई दें परंतु लगभग 60% व्यक्तियों में प्रोडोम चरण के लक्षण दिखाई पड़ते हैं।

इस चरण में व्यक्ति प्रकाश के प्रति अति संवेदनशील हो जाता है और आवाज और गंध के कारण वह असहज महसूस करता है। नीचे कुछ प्रोड्रोम चरण के लक्षण दिए गए हैं, जिनसे आप अधकपारी का दर्द होने से कुछ घंटे पहले या 1 दिन पहले इसका पता लगा सकते हैं।

  • आवाज के प्रति संवेदनशीलता
  • प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
  • गंध के प्रति संवेदनशीलता होती है
  • थकान महसूस होती है
  • कम भूख लगना
  • गला सूखा रहना और अधिक प्यास का एहसास
  • कब्ज या दस्त की समस्या

2. ओरा

माइग्रेन का दर्द अक्सर हमारे नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है और इस चरण में यह लक्षण हमारे नर्वस सिस्टम से संबंधित देखे जाते हैं। अधकपारी का दर्द शुरू होने से पहले नर्वस सिस्टम संबंधी समस्याएं होती हैं जैसे सामान्य दृष्टि का ना होना।

15 से 20% लोग ही इस चरण के लक्षणों को महसूस करते हैं। यह लक्षण 5 से 15 मिनट के समय में धीरे-धीरे शुरू होते देखे जा सकते हैं।

  • लहरदार रेखाएं, काले बिंदु या प्रकाश की चमक देखना जो वहां पर मौजूद नहीं होते। इसे अंग्रेजी में हेलो-सिनेशन कहते हैं।
  • कुछ समय के लिए आंखों से अंधा हो जाना और कुछ ना देख पाना।
  • शरीर के एक तरफ का हिस्सा सुन होना।
  • शरीर के एक हिस्से में झनझनाहट होना।
  • बोलने पर तकलीफ होना।
  • पैरों और हाथों में भारीपन
  • स्वाद और गंध में बदलाव
  • कानों में अलग-अलग आवाज सुनाई देना
  • स्पर्श अच्छे से महसूस ना करना

3. अटैक

इस चरण में माइग्रेन दर्द के कारण शारीरिक गतिविधि पर प्रभाव पड़ता है। अटैक चरण में Migraine का दर्द एक तरफ से दूसरी तरफ जा सकता है या पूरे सिर में दर्द हो सकता है। इस चरण में शारीरिक हालत अधिक बिगड़ जाती है। लगभग 80 से 85% व्यक्तियों में इस चरण के माइग्रेन के लक्षण देखे जा सकते हैं।

  • सिर का दर्द एक तरफ से दूसरी तरफ जाना
  • पूरे सिर में दर्द का महसूस करना
  • उल्टी होना
  • मितली आना
  • बेहोशी महसूस करना

4. पोस्ट ड्रोम

पोस्ट ड्रोम अधकपारी के दर्द का आखरी चरण होता है और इस चरण में माइग्रेन के लक्षण भिन्न होते हैं। पोस्ट ड्रोम के लक्षणों को आप कुछ घंटे या 1 दिन बाद तक भी महसूस कर सकते हैं। इस चरण में अधकपारी के लक्षण नीचे दिए गए हैं।

  • अत्यधिक थकान महसूस करना
  • असामान्य रूप से खुशी और तरोताजा महसूस होना
  • मांसपेशियों में दर्द
  • भूख की कमी

इन सभी चरणों में दिए गए माइग्रेन के लक्षण के अलावा भी अन्य लक्षण Migraine के मरीज में देखे जा सकते हैं। कुछ लक्षण नीचे दिए गए हैं।

  • एकाग्रता का भंग होना
  • लगातार पसीना आना
  • गर्मी लगना या ठंड महसूस करना
  • पेट में दर्द होना
  • बिना सिर दर्द के इन लक्षणों का महसूस होना
  • 1 सप्ताह तक थकावट महसूस करना

माइग्रेन के कारण डॉक्टर से सलाह कब ले?

कुछ मामलों में अधकपारी अपने आप ठीक हो जाता है लेकिन ज्यादातर मामलों में उसके लिए घरेलू इलाज, नुस्खे, दवाइयां इत्यादि देनी पड़ती है। यदि किसी व्यक्ति को घरेलू इलाज, नुस्खे, दवाइयों से आराम नहीं हो रहा है और सिर में दर्द लगातार बना हुआ है तो आपको डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।

अधकपारी होने पर दर्द निवारक गोलियों का सेवन अधिक मात्रा में नहीं करना चाहिए। क्योंकि यदि आप ऐसा करते हैं तो कुछ समय बीत जाने के पश्चात आपको और अधिक मात्रा में दर्द निवारक गोलियों का सेवन करना पड़ेगा और एक समय ऐसा आएगा कि दर्द निवारक गोलियों से आपको आराम नहीं होगा।

यदि आपके सिर का दर्द दवाई लेने से ठीक हो जाता है या घरेलू इलाज करने से ठीक हो जाता है, परंतु लगभग हर हफ्ते आपको यह दर्द हो रहा है तो आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टर आपको और रोग निरोधी उपचार प्रस्तावित करेंगे जिससे आप माइग्रेन की समस्या को दूर कर सकते हैं।

कुछ ऐसी स्थिति हैं जिसमें तुरंत चिकित्सीय उपचार की जरूरत पड़ती है। नीचे कुछ ऐसी स्थिति दी गई है यदि आप नीचे दिए गए अधकपारी के लक्षण देख रहे हैं तो आपको तुरंत चिकित्सीय सहायता की जरूरत है।

  • शरीर के एक तरफ या दोनों तरफ लकवा
  • जुबान लड़खड़ाना
  • अचानक सिर में असहनीय दर्द का अनुभव
  • अचानक से सिर दर्द के साथ बुखार
  • गर्दन अकड़ना
  • असहज दिमागी समस्या महसूस करना
  • दौरे पड़ना
  • दृष्टि का चले जाना
  • चिड़चिड़ापन
  • त्वचा में चुभन महसूस होना
  • आंखों के नीचे काले घेरे
  • गुस्सा आना

माइग्रेन के कारण

अधकपारी के अलग-अलग कारण हो सकते हैं। यह आपकी शारीरिक और मानसिक भावना के साथ साथ आपकी जीवनशैली और आहार पर भी निर्भर करता है। इसके साथ-साथ हार्मोन में बदलाव भी माइग्रेन का कारण बनता है।

हमने कुछ महत्वपूर्ण माइग्रेन के कारण नीचे दिए हैं। जिन्हें जानकर आप इस समस्या से दूर रह सकते हैं और अधकपारी के कारण पता लगा सकते हैं।

1. माइग्रेन होने के शारीरिक कारण

  • अच्छी नींद ना लेना – यदि आप समय पर और अच्छी नींद नहीं ले रहे हैं तो आपको अधकपारी होने की संभावना बढ़ जाती है। नींद पूरी न होने पर हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव पड़ता है और अनेकों प्रकार की बीमारियां शरीर में लगती हैं, जिनमें से अधकपारी की समस्या भी एक है।
  • अलग-अलग शिफ्ट में काम करना – यदि काम करने का एक समय निर्धारित नहीं है और अलग-अलग शिफ्ट में आप कार्य करते हैं तो ऐसा करना माइग्रेन होने का कारण बन सकता है। ऐसा होने पर शरीर को आराम नहीं मिल पाता और अधकपारी की समस्या उत्पन्न होती हैं।
  • थकान – किसी कारणवश आप थकान महसूस करते हैं और लगातार आपका शरीर थका हुआ होता है तो यह माइग्रेन के कारणों में से एक होता है।
  • गलत मुद्रा में सोना – बहुत सारे व्यक्ति सही मुद्रा में नहीं सोते। इसके साथ साथ ज्यादा ऊंचे तकिए का उपयोग सोते समय करना भी माइग्रेन की समस्या उत्पन्न कर सकता है। गलत मुद्रा में सोने के कारण हमारा शरीर असहज महसूस करता है और यह अधकपारी का कारण बनता है।
  • कंधे या गर्दन में खिंचाव – यदि किसी कारण गर्दन या कंधे में खिंचाव होता है तो यह माइग्रेन के दर्द को उत्पन्न कर सकता है।
  • कम ब्लड शुगर – ब्लड शुगर का बढ़ना और कम होना दोनों ही हमारे शरीर के लिए नुकसानदायक होते हैं। यदि आपके खून में शर्करा की मात्रा यानी शुगर की मात्रा कम है तो इस कारण आपको अधकपारी हो सकता है।
  • कठोर व्यायाम – यदि आप व्यायाम करने के आदी नहीं हैं और आप एकदम से कठोर परिश्रम करते हैं तो इस कारण आप माइग्रेन की समस्या को बुलावा दे सकते हैं।
  • जैट लैग – जो व्यक्ति कई घंटों तक हवाई जहाज से यात्रा करते हैं उन्हें भी माइग्रेन का दर्द हो सकता है।

2. औषधियों के कारण माइग्रेन होना

  • नींद की गोलियां – जो व्यक्ति नींद लेने के लिए नींद की गोलियों का प्रयोग करते हैं, उन्हें माइग्रेन होने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ इस प्रकार की नींद की गोलियां मौजूद हैं जिनके लगातार सेवन से अधकपारी होना आम है। इसीलिए अपने डॉक्टर की सलाह इसके बारे में जरूर लें।
  • गर्भनिरोधक गोलियां – गर्भनिरोधक गोलियां माइग्रेन की समस्या को बढ़ा सकती हैं, और यदि आप समस्या से पीड़ित नहीं है तो भी यह समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • एच आर टी – एचआरटी का मतलब है हार्मोन प्रतिस्थापन थेरेपी। महिलाएं इस थेरेपी को मासिक धर्म बंद होने के पश्चात उनके लक्षणों से छुटकारा पाने के लिए लेती हैं। एचआरटी के कारण अधकपारी की समस्या हो सकती है।

3. माइग्रेन होने के मानसिक कारण

  • उत्सुकता – यदि आप एकदम से उत्सुक हो जाते हैं। या किसी घटना के कारण एकदम से उत्सुकता बढ़ती है तो यह माइग्रेन होने का कारण बनता है।
  • तनाव – यदि आप कुछ समय या लंबे समय से तनाव में है, तो अधकपारी होना आम है। लगातार तनाव में रहना माइग्रेन बीमारी को न्योता देता है।

4. भोजन से जुड़े माइग्रेन के कारण

  • अनियमित भोजन का सेवन – यदि भोजन करने के समय में अनियमितता होती है तो इसके कारण माइग्रेन के दर्द से आपको सूचना पड़ सकता है। कई व्यक्ति किसी समय का भोजन छोड़ देते हैं, या एक ही समय में बहुत ज्यादा भोजन का सेवन कर लेते हैं। ऐसा करना माइग्रेन का कारण बन सकता है।
  • मदिरा का सेवन – मदिरा का सेवन करने से बहुत सारी बीमारियां हो सकती हैं जिनमें से अधकपारी भी एक है।
  • चाय या कॉफी का अधिक मात्रा में सेवन – किसी भी चीज का अधिक मात्रा में सेवन नुकसानदायी होता है। यदि आप चाय या कॉफी का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं तो कैफीन के कारण अधकपारी की समस्या को बढ़ावा मिलता है।
  • पानी की कमी – पानी की कमी को डिहाइड्रेशन भी कहते हैं। पानी की कमी के कारण अधकपारी होना आम बात है। इसीलिए हमें शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए।

5. माइग्रेन के कुछ बाहरी कारण

  • प्रकाश – यदि एकदम से चमकता हुआ प्रकाश आपकी आंखों पर पड़ता है तो इससे माइग्रेन हो सकता है।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की टिमटिमाती बत्ती – हम अपने घरों में टेलीविजन या कंप्यूटर इत्यादि का उपयोग करते हैं। यदि किसी टीवी या कंप्यूटर या फिर किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में टिमटिमाती बत्ती आप देखते हैं तो इससे एकदम से अधकपारी हो सकता है।
  • धूम्रपान – यदि कोई व्यक्ति आपके पास धूम्रपान कर रहा है या खुद आप तोमर पान कर रहे हैं तो उसका रंग भी आपको माइग्रेन हो सकता है।
  • शोर – यदि बहुत तेज आवाज आपके पास है, या अत्यधिक शोर में आप बैठे हैं तो यह माइग्रेन दर्द का कारण बनता है।
  • जलवायु परिवर्तन – अत्यंत नमी है या ठंडे तापमान में एकदम से होने वाले परिवर्तन के कारण भी यह सिर का दर्द आपको हो सकता है।
  • घुटन भरा वातावरण – यदि आप किसी ऐसे बंद कमरे या फिर घुटन भरे वातावरण में बैठे हैं तो इससे अधकपारी की समस्या होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • तीखी गंध – एकदम से किसी मसाले की तीखी गंध आना या फिर किसी भी प्रकार की तीखी गंध जैसे परफ्यूम इत्यादि से भी माइग्रेन हो सकता है।

माइग्रेन के उपाय

माइग्रेन से बचने के लिए आपको जीवन शैली में बदलाव करने की जरूरत है और यदि आप ऐसा आहार ले रहे हैं जो इसे बढ़ावा देता है तो उसे बदलकर पोस्टिक आहार लेने की जरूरत है। नीचे हमने कुछ जीवन शैली में बदलाव के कुछ उपाय आपको बताए हैं और कुछ घरेलू इलाज भी आप यहां पर देख सकते हैं।

जीवन शैली में बदलाव से माइग्रेन के उपाय

  • यदि आप एयर कंडीशनर का इस्तेमाल करते हैं, तो ऐसी जगह जाने से बचें जहां पर एकदम से गर्मी है। यदि घर पर एयर कंडीशनर का प्रयोग करते हैं तो अपने कार्यालय में और जिस वाहन से आप यात्रा करें उसमें भी एयर कंडीशनर जरूर उपयोग करें। ऐसा करने से आप खुद को एकदम से तापमान में होने वाले बदलाव से बचाते हैं।अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो जिस जगह पर आप एयर कंडीशनर का प्रयोग कर रहे हैं उस जगह को छोड़ने से पहले उसे बंद कर दें और जब तापमान सामान्य हो जाए तब आप उस जगह से गर्मी वाली जगह में जा सकते हैं। यदि आप ऐसा करते हैं तो आप तापमान में होने वाले बदलाव के कारण होने वाले माइग्रेन से बच सकते हैं।
  • गर्मियों में तेज धूप में बाहर निकलने से बचें। यदि किसी कारणवश तेज धूप में बाहर निकलना पढ़े तो छाते और सनग्लास का प्रयोग करें।
  • गर्मी के मौसम में लंबी यात्रा करने से परहेज करें।
  • हर रोज कम से कम 10 गिलास पानी जरूर पिएं। पानी की कमी या नहीं डिहाइड्रेशन के कारण माइग्रेन की समस्या होती है। यदि आप उचित मात्रा में पानी का सेवन करेंगे तो आप माइग्रेन की समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
  • ऐसे भोजन से बचें जिसमें कैफीन की मात्रा है जैसे चाय या कॉफी। इसके साथ साथ उमस वाले मौसम में यदि किसी खाने के सेवन के पश्चात ज्यादा पसीना आता है तो उस खाने से परहेज करें।
  • ज्यादा तीखा खाना ना खाएं और अपने ब्लड प्रेशर को सामान्य रखें।
  • महिलाएं गर्भनिरोधक गोलियों का सेवन ना करें। यदि जरूरत पड़ती है तो कम मात्रा में इनका प्रयोग करना चाहिए।
  • देर तक ना सोए और सुबह नंगे पांव घास पर चलें। ऐसा करने से तनाव कम होता है और हमारे हार्मोंस भी बैलेंस रहते हैं।
  • यदि व्यायाम की आदत नहीं है तो एकदम से ज्यादा व्यायाम ना करें बल्कि रोजाना 30 मिनट योगासन या परिणाम से शुरू करें। बाद में इस अवधि को आप बढ़ा सकते हैं और व्यायाम कर सकते हैं।
  • अपने भोजन में तरल पदार्थों का सेवन बढ़ाएं।
  • नमक की मात्रा भोजन में कम करें और फल व हरी सब्जियां खाएं।
  • एल्कोहल और चॉकलेट जैसी चीजें खाने से परहेज करें और इसके साथ-साथ तले मसाले और फास्ट फूड खाना भी माइग्रेन को बढ़ावा देता है।
  • यदि आप अधकपारी की समस्या से परेशान हैं तो उपवास न रखें क्योंकि ऐसा करना इसे और अधिक बढ़ावा देता है।
  • बालासन, उत्तानासन, सेतबंधू सर्वांगासन, हलासन इत्यादि आसन करना अधकपारी में फायदा पहुंचाता है।
  • तेज आवाज में गाने ना सुने।

माइग्रेन के घरेलू उपाय

1. पुदीने के उपयोग से माइग्रेन का उपाय

पुदीना माइग्रेन के कारण होने वाली सूजन को कम करने में सहायक है। यदि आप चाय का सेवन करते हैं तो उसमें पुदीना की कुछ बूंदें मिलाकर पीने से राहत मिलती है। यदि चाय का सेवन नहीं करते हैं तो पुदीना ऑयल की कुछ बूंदे एक चम्मच शहद में मिला लें और आधे गिलास पानी के साथ इसका सेवन करें।

पुदीना तेल से सिर और माथे पर मालिश करने से भी फायदा पहुंचता है।

2. सेब का सिरका

सेब का सिरका माइग्रेन में राहत दिलाने का कार्य करता है। एक गिलास पानी लें और उसमें छोटा चम्मच सेब का सिरका और छोटा चम्मच शहद मिलाकर उसका सेवन करें।

जब आपको माइग्रेन होने के लक्षण दिखाई देते हैं तो उस समय इस मिश्रण का सेवन अधिक करना चाहिए। अधकपारी के शुरुआती लक्षण देखने पर सेब के सिरके की मात्रा दो से तीन गुना बढ़ा सकते हैं। सेब का सिरका, एक चम्मच शहद, पानी का मिश्रण शरीर के वजन को कम करने के साथ-साथ शुगर और ब्लड प्रेशर को भी सामान्य स्तर पर रखता है।

लो शुगर और ब्लड प्रेशर के कारण माइग्रेन की समस्या होती है। यदि आप सेब के सिरके का सेवन नियमित तौर पर करते हैं तो आपको माइग्रेन में बहुत फायदा मिलेगा। ग्रीन एप्पल यानी हरे रंग का सेब सूंघने पर भी अधकपारी में राहत मिलती है।

3. बर्फ़ का प्रयोग

अधकपारी होने की वजह से मांसपेशियां सूज जाती हैं। माइग्रेन का दर्द होने पर एक साफ़ तौलिया या मोटा कपड़ा ले और उसमें कुछ बर्फ के टुकड़े रखकर सिर्फ बातें और गर्दन के पीछे लगाएं। इस तरह से बर्फ की सिकाई करने से अधकपारी ठीक होता है।

यदि आप इस बर्फ की सिकाई का असर जल्दी देखना चाहते हैं तो आप पुदीना तेल की कुछ बूंदे बर्फ में मिला लें। ऐसा करने से आपको तुरंत असर दिखेगा।

4. तुलसी का तेल

तुलसी के तेल में आयुर्वेदिक गुण मौजूद होते हैं। गर्दन के पिछले हिस्से और माथे पर तुलसी के तेल से हल्की हाथों से मालिश करने पर इसमें राहत मिलती है। तुलसी का तेल लगाने पर मांसपेशियों को राहत मिलती है और अधकपारी से होने वाली सूजन कम होती है।

5. धनिया की चाय

पुराने समय में धनिए का प्रयोग माइग्रेन की दवा के रूप में भी किया जाता था। धनिया के बीजों से तैयार चाय का सेवन करने से यह खाने को पचाने के साथ-साथ अधकपारी में राहत दिलाता है।

6. लैवेंडर तेल

लेवेंडर तेल में बहुत गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की अलग-अलग समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है। लैवेंडर तेल के उपयोग से थकान और तनाव दूर होता है। चूँकि, थकान और तनाव के कारण माइग्रेन होता है इसलिए यह अधकपारी ठीक करने में बहुत अधिक सहायक है।

माइग्रेन के शुरुआती लक्षण दिखने पर लैवेंडर तेल को सूंघने से आराम मिलता है, और अधकपारी की समस्या दूर होती है।

दौरे के दौरान माइग्रेन का उपचार

यदि किसी व्यक्ति को माइग्रेन के कारण दौरा पड़ा है तो उसे तुरंत चिकित्सीय सहायता की जरूरत होती है। लेकिन जब तक चिकित्सीय सहायता ना मिले तब तक अंधेरे कमरे में सोने अथवा लेटने से आराम मिलता है।

माइग्रेन का दर्द होने पर अंधेरे कमरे में आराम करना चाहिए और उसके साथ-साथ कुछ खा लेना अधकपारी के निवारण में मदद करता है।

दर्द निवारक दवाइयों का उपयोग – वेदनाहर औषधियाँ

बहुत सारे व्यक्ति दर्द निवारक गोलियां जैसे एस्प्रिन, पेरासिटामोल और इबुप्रोफेन का सेवन माइग्रेन के दर्द से छुटकारा पाने के लिए करते हैं। यदि आपको माइग्रेन दर्द शुरू होने के शुरुआती लक्षण दिखते हैं, तो दर्द निवारक गोलियां प्रभाव कारी होती हैं।

जब माइग्रेन दर्द शुरू होता है उसी समय वेदनाहर औषधि लेने से काफी आराम मिलता है और अधकपारी के कारण होने वाले लक्षणों को भी कम करती हैं। कुछ ऐसी दर्द निवारक गोलियां मौजूद होती हैं जिन्हें पानी में घोलकर पिया जाता है ऐसी औषधियां अधकपारी दर्द शुरू होते ही लेने पर लाभ देती हैं।

माइग्रेन का दर्द शुरू होते ही इन औषधियों का सेवन कर लेना चाहिए। यदि ऐसा नहीं करेंगे तो सिर दर्द और अधिक बढ़ सकता है और हालत बिगड़ सकती है।

दर्द निवारक दवाइयां लेने पर सावधानी बरतें

  • जिस भी दर्द निवारक दवाई का आप सेवन कर रहे हैं सुनिश्चित करें कि उसके पैकेजिंग पर वर्णित निर्देशों को आपने पढ़ा है और निर्धारित खुराक का पालन किया है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों को दर्द निवारक दवाइयां जैसे एस्प्रिन या इबुप्रोफेन इत्यादि का प्रयोग नहीं करना चाहिए। यदि ऐसा करते हैं तो इसके कारण लीवर की समस्या, अल्सर, गुर्दे और पेट की समस्याएं हो सकती हैं। यदि 16 वर्ष से कम आयु को दर्द निवारक दवाइयां दे दो डॉक्टर द्वारा सलाह जरूर लें।
  • माइग्रेन के दर्द में बार-बार दवाई लेने से भविष्य में अधकपारी की समस्या और अधिक बढ़ सकती है जो इन दवाइयों के प्रयोग से ठीक नहीं होती।
  • यदि माइग्रेन के दर्द के कारण आपको बार-बार दर्द निवारक औषधियों का उपयोग करना पड़ रहा है तो एक बार डॉक्टर द्वारा सलाह जरूर लें।
  • डॉक्टर द्वारा निर्धारित और बताए गए खुराक का सेवन करें और यदि इससे आराम नहीं मिलता तो दोबारा से डॉक्टर को इसके बारे में बताएं।

Triptans औषधि का प्रयोग

Triptans दवाइयां माइग्रेन के लक्षणों को कम करने में सहायक होती हैं। यह दवाइयां डॉक्टर से सुझाव लेने के पश्चात लेनी चाहिए। जब आपको साधारण दर्द निवारक दवाइयों से आराम नहीं मिलता तो डॉक्टर आपको ट्रिपटैंस दवाइयां लेने की सलाह देते हैं।

माइग्रेन का दर्द होने पर रक्त वाहिकाओं मैं फैलाव होता है और यह Triptans दवाइयां रक्त वाहिकाओं में सिकुड़न पैदा करती हैं और उन्हें फैलने से रोकती हैं। Triptans औषधि गोलियों, इंजेक्शन, नाक के स्प्रे के रूप में उपलब्ध होती हैं।

माइग्रेन का इलाज – एंटी-सिक्नेस औषधियाँ

एंटी-सिक्नेस औषधियाँ आमतौर पर डॉक्टर द्वारा दर्द निवारक दवाइयों के साथ और ट्रिपटैंस के साथ दी जाती हैं। ये दवाएँ अधकपारी में बहुत उपयोगी होती हैं।

एंटी-सिक्नेस दवाइयाँ शुरुआती अधकपारी के लक्षण दिखते हैं लेने से अधिक लाभ देती है। यह दवाई माइग्रेन का उपचार सफलतापूर्वक कर सकती हैं। इन दवाइयों के उपयोग से कुछ व्यक्तियों को चक्कर और दस्त भी हो सकते हैं।

गर्भवती महिलाओं में माइग्रेन का उपचार

गर्भवती महिलाओं को अधकपारी होने पर दर्द निवारक गोलियां खाने से बचना चाहिए। आमतौर पर डॉक्टर द्वारा ट्रिपटैंस दवाइयों के साथ कम दर्द निवारक दवाइयां परामर्श की जाती हैं। गर्भवती महिलाओं को माइग्रेन का दर्द होने पर बिना डॉक्टर के सलाह के कोई भी दवाई नहीं लेनी चाहिए।

गर्भवती महिलाओं में माइग्रेन का दर्द शुरू होने पर एक बार डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

माइग्रेन के नुकसान

माइग्रेन के नुकसान की संख्या अधिक है। कुछ व्यक्ति माइग्रेन के लक्षण पहचान नहीं पाते और उन्हें तेज सिर दर्द के साथ उल्टी और चक्कर इत्यादि जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अगर शुरुआती लक्षणों को ना पहचाना जाए तो समस्या गंभीर भी हो सकती हैं।

नीचे कुछ माइग्रेन के नुकसान दिए गए हैं। यदि लंबे समय तक आप इस बीमारी को झेल रहे हैं तो आपको निम्नलिखित समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

  • ब्रेन स्ट्रोक – ब्रेन स्ट्रोक एक बहुत गंभीर बीमारी है और यह माइग्रेन के कारण हो सकती है। कुछ मामलों में यह देखा गया है कि माइग्रेन के कारण ब्रेन स्ट्रोक बीमारी हुई है जिसके कारण व्यक्ति को सर्जरी करवाने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। अधकपारी के कारण ब्रेन स्ट्रोक होना एक बहुत ही गंभीर स्थिति है। इसीलिए अधकपारी का इलाज समय पर करवाना अति आवश्यक है।
  • पेट में दर्द – अधकपारी का असर हमारे दिमाग पर पड़ता है। जब अधकपारी का दर्द होता है तो हमारा दिमाग सही से काम नहीं कर पाता और इसी कारण हमें अन्य शारीरिक समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। पेट का दर्द भी उनमें से एक है। कुछ व्यक्तियों को अधकपारी होने पर पेट में दर्द शुरू हो जाता है, जिसका स्तर काफी तेज हो सकता है।
  • अनिद्रा – माइग्रेन होने के कारण हमें अनिद्रा से जूझना पड़ता है। यदि अधकपारी लंबे समय तक रहता है तो अनिद्रा जैसी बीमारी में जकड़ लेती है। आमतौर पर अधकपारी के कारण अनिद्रा अस्थाई बीमारी होती है, लेकिन यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह अस्थाई तौर पर भी आपको परेशान कर सकती है।
  • दृष्टिहीन होना – कुछ मामलों में अधकपारी होने पर दृष्टि संबंधी समस्याएं देखने को मिलती हैं। कुछ लोगों को माइग्रेन का दर्द होने से पहले या उसके दौरान दिखना बंद हो जाता है। आमतौर पर ऐसा बहुत कम मामलों में देखा जाता है परंतु यदि इसका समय पर इलाज ना हो तो यह स्थाई तौर पर भी रह सकता है।
  • लकवा – कुछ मामलों में अधकपारी के कारण शरीर के एक तरफ या दोनों तरफ लकवा हो जाता है। ऐसा होने पर तुरंत इलाज करवाना जरूरी है अन्यथा यह अस्थाई तौर पर भी रह सकता है।

माइग्रेन में क्या खाना चाहिए

  1. माइग्रेन में सेब का सिरका अत्यंत उपयोगी होता है। ताजा से दिखाना जी अत्यंत फायदेमंद होता है आप हरीश जी को सूंघकर अधकपारी में आराम आ सकते हैं।
  2. अदरक का सेवन माय ट्रेन में काफी फायदेमंद रहता है। अगर अदरक का सेवन कच्चा ने किया जाए तो शहद में मिलाकर इसका सेवन करना चाहिए।
  3. दूध, दही और पनीर इत्यादि माइग्रेन में खाने पर आराम दिलाने में सहायता करते हैं।
  4. प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।
  5. दालें, सलाद इत्यादि का सेवन उपयोगी साबित होता है।
  6. ताजा फल और ड्राई फ्रूट का सेवन करना चाहिए।

माइग्रेन में क्या नहीं खाना चाहिए?

  1. बाहर की चीजें जैसे जंक फूड तला हुआ भोजन इत्यादि।
  2. डिब्बाबंद खाने का सामान।
  3. ज्यादा मिर्च मसाले वाले भोजन।
  4. चाय और कॉफी का सेवन परिस्थिति को बिगाड़ सकता है।
  5. कोल्ड ड्रिंक जैसे पेयजल का सेवन नहीं करना चाहिए।

माइग्रेन की आयुर्वेदिक दवा

  • मेघावटी की दो गोलियां सुबह और शाम लेने से अधकपारी में आराम मिलता है।
  • 10 ग्राम गोदंती, मोती पिष्टी 3 ग्राम और 10 ग्राम प्रवाल पिष्टी लेकर तीनों का चूर्ण बनाकर मिक्स कर लें। 3 से 4 ग्राम शहद इस मिश्रण में मिलाएं और इसका सेवन करने से अधकपारी में फायदा पहुंचता है।
  • शुद्ध देसी घी की जलेबी का सेवन दूध के साथ करें, ऐसा करना अधकपारी ठीक करने में सहायक है।
  • खसखस और मखाना की खीर
  • एक चम्मच बादाम रोगन को एक गिलास दूध में मिलाकर पीने से अधकपारी का दर्द ठीक होता है। यदि बादाम रोगन ना हो तो गुड और दूध का सेवन करने से भी माइग्रेन का दर्द ठीक होता है और आराम मिलता है।

माइग्रेन में किन-किन चीजों से परहेज करना चाहिए?

  • फास्ट फूड
  • शराब
  • अधिक मात्रा में चाय और कॉफी का सेवन
  • आर्टिफिशियल शुगर
  • प्रिजर्व्ड मीट
  • पैकेटबंद या डिब्बाबंद सामान

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